
मैंने आज ब्लागिंग को अलविदा कहने का मन बना लिया है , मैनें हमेशा वही लिखा और कहा जो मुझे सार्थक लगा । किसी को भी नीचा दिखाना मेरे समझ से परे रहा है और रहेगा । मेरे लेखन से अगर किसी को दुख हुआ है तो इसके लिए खुद को दोषी समझता हूँ । मुझे किसी भी मुद्दे ( हल्का - फुल्का या गंभीर ) पर बहस करना प्रिय लगा है हां यहां यह बात जरूर ध्यान देता हूँ कि सार्थकता बनी रहे अर्थात कुर्तक न हो ।
ब्लागिंग में मुझे आये हुए अभी कुछ ही महीने बीते हैं पर जो उत्साह चिट्ठाकारी को लेकर मैं आया था वह अब जाता रहा है । मैं किसी भी गुटबंदी का विरोध करता हूँ चाहे वो कहीं भी हो या किसी भी रूप में क्यों न हो ? लोग अपने से बड़े की आदतों से ही काफी कुछ सीखते हैं और मैंने बहुत कुछ ऐसा ही करने की कोशिश की पर मैं नाकाम रहा । मुझसे किसी तरह की चाटुकारिता न हो सकेगी । इसलिए मेरा यहां पर स्थान भी नही है । वैसे भी ब्लागिंग मैंनें स्वेच्छा से की और स्वेच्छा से इससे दूर भी हो रहा हूँ । जब तक हमको लक्ष्य का पता ही न हो तो अंधेरे में तीर चलाने से क्या फायदा ? मेरी समझ तो ऐसी ही लिखाई ( ब्लागियाई) हो रही है । कभी कभी कुछ पोस्टों को पढ़कर मन प्रसन्नचित हो जाता है । मगर कुछ लोगों को गांधीगीरी का शौक चर्राया है ( मगर ऐसे गुण नहीं हैं ) ।
मैंनें किसी एक को निशाना नहीं बनाया है मेरा सभी से निवेदन था कि सार्थक लिखा जाय और यह बात सभी के लिए लागू होती है । कोई " रंडी " लिखता है......... क्या अगर यहां पर " वेश्या " लिखा जाय तो गलत होगा ? लेकिन नहीं भई मेरा तो रूतबा है .....मेरी जी हुजूरी करने वाले हैं , जब चाहें अपनी बात के लिए बीसियों टिप्पणी कराकर तुमको धूल चटा सकते हैं । मैं किसी का नाम नहीं लूंगा पर जिस तरह से राजनीति हो रही है ब्लागिंग में मैं इसका समर्थन नहीं कर सकता हूँ । तुम्हारी मां.....तुम्हारी बहन की..... ..........मां बहन तक को नहीं छोड़ते गालियां देने में और यह किसी एक की समस्या नहीं है बल्कि हमारी सबकी है । मैं कभी भी अपने किसी भी पोस्ट पर बहस से पिछे नहीं हटा , जितने भी बहस हुए मैंने जरुर भाग लिया , क्योंकि मुझे लगा कि बहस होगी तो परिणाम जरुर आयेगा , विवाद कभी नहीं चाहा । लेकिन कुछ दिंन बाद समझ आयी कि यहाँ बहस करने से कोई फायदा नहीं होंने वाला । यहाँ आपके ज्यादा लिंक है लोगो से आपकी बात सर्वमान्य होगी , यहाँ बड़े लोगो का भी ग्रुप है जिसे आप गलत नहीं ठहरां सकते , वे चाहे जो लिखे ।
बातें तो न जाने कितनी गूंज रहीं हैं कानों में ......................पर अब बस यही सूझ रहा है । कई लोगों का साथ और स्नेह मुझे मिला चिट्ठाकारी के दौरान जिसका मैं सदा आभारी रहूँगा ।यहाँ मेरे बहुत से रिश्ते बंने , बडे भाई, दीदी माँ बहन दोस्त बहुत से रिश्ते जिन्होंने मुझे बहुत प्यारा दिया जो की मैं शायद कभी भी भूल ना पाऊं । जिन्होंने मुझे पढ़ा और मुझे प्रोत्साहित किया उनको धन्यवाद । मेरा किसी से भी किसी प्रकार का गीला सिकवा नाराजगी नहीं है , आप सब सही है । शायद उम्र कम होंने की वजह से कुछ बाते समझ नहीं पाया, इसके लिए अगर नादानी में मैंने किसी को कुछ भी अपशब्द कहा हो गलत भाषा का प्रयोग किया हो तो उसके लिए दिल से क्षमा मांगता हूँ । मैंने हमेशा कोशिश की , कि अपने से बडो़ को इज्जत दूँ अगर मैं ऐसा नहीं कर पाया किसी कारण वश तो उसके लिए भी क्षमा प्रार्थीं हूँ ।मेरे लिए यह फैसला लेना बहुत मुश्किल था , लेकिन दिल ने इजाजत दे दी । जारी रखिये आप लोग हिन्दी ब्लोगिंग को और आगे बढाईये ऐसे ही मैं तो चला यहां से...........................बाय-बाय ।
मिथिलेश दुबे
54 टिप्पणियाँ:
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